जबलपुर : सीएम को अजय का पत्र,प्रदेश में काबिल शिक्षक नहीं,बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव,कैसे लागू होगी नई शिक्षा नीति - अजय विश्नोई - Madhya Live Khabar

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जबलपुर : सीएम को अजय का पत्र,प्रदेश में काबिल शिक्षक नहीं,बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव,कैसे लागू होगी नई शिक्षा नीति - अजय विश्नोई








जबलपुर: [संवाददाता डेस्क] अजय विश्नोई भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं, इसके बाद भी उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ सच्चाई बयान करने की कोशिश की है।
अजय विश्नोई का आरोप है कि अभी स्कूलों में खास तौर पर सीबीएसई के स्कूलों में जो पुस्तकें पढ़ाई जा रही हैं, उनके कंटेंट पर कोई काम नहीं किया जाता..
मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे पाटन विधायक अजय विश्नोई ने आरोप लगाया है कि मध्य प्रदेश में काबिल शिक्षक नहीं हैं और स्कूलों में भी बुनियादी जरूरतों का भारी अभाव है। इसीलिए नई शिक्षा नीति लागू करने से पहले राज्य सरकार को पहले बुनियादी जरूरतों को सुधार लेना चाहिए, इसके बाद ही नई शिक्षा नीति को प्रदेश में लागू करना चाहिए।

भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कहा है की केंद्र सरकार को टेक्स्ट बुक के लिए एक रेगुलेटरी कमिशन बनाना चाहिए, जो स्कूलों में चलने वाली टेक्स्ट बुक को जांचने के बाद इस बात की अनुमति दें कि ये पुस्तक पढ़ाई जा सकती है या नहीं। अजय विश्नोई का आरोप है कि अभी स्कूलों में खास तौर पर सीबीएसई के स्कूलों में जो पुस्तकें पढ़ाई जा रही हैं, उनके कंटेंट पर कोई काम नहीं किया जाता और स्कूल अपने मन से पुस्तकें लागू कर देते हैं।

शिवराज को पत्र लिख दी सलाह :

जय विश्नोई ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को भी चिट्ठी लिखी है, जिसमें एक सलाह दी गई है कि हर गांव में स्कूल खोलने की बजाए 10 किलोमीटर पर एक ऐसा स्कूल खोला जाए, जिसमें स्मार्ट क्लास, सभी विषयों के शिक्षक, खेलकूद की पूरी व्यवस्था और 10 किलोमीटर के रेडियस में आने वाले बच्चों को लाने की सुविधा की जाए। इससे शिक्षकों द्वारा स्कूलों में गुणवत्ता की पढ़ाई करवाई जा सकेगी।
अजय विश्नोई भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं, इसके बाद भी उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ सच्चाई बयान करने की कोशिश की है। सामान्य तौर पर राजनीति में ऐसा नहीं होता, लेकिन उन्होंने जिस मुद्दे पर राज्य और केंद्र सरकार का ध्यान खींचा है वो बहुत गंभीर और जरूरी मुद्दा है। इस पर राज्य और केंद्र को विचार करना चाहिए और शिक्षा नीति में कुछ बुनियादी बदलाव करने चाहिए।