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जबलपुर - नगर निगम और निजी संस्थाओं का सांठगांठ उजागर,खुलेआम गाइडलाइन की उड़ाई गई धज्जियां,प्रशासन की बड़ी चूक

जबलपुर - [संवाददाता डेस्क]
प्रशासन को अंधेरे में रखकर कोरोना संदिग्ध शवों के अंतिम संस्कार में बड़ी लापरवाही सामने आई है। दरअसल सरकार द्वारा तय गाइडलाइन के मुताबिक कोरोना संक्रमित मरीज हों या फिर कोरोना के संदिग्ध, उनके अंतिम संस्कार के लिए जबलपुर में गढ़ा के समीप सूपाताल कब्रिस्तान और चौहानी मुक्तिधाम और रानीताल श्मशानघाट को चिन्हित किया गया है, बावजूद इसके गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाते हुए कुछ लोग नगर निगम और निजी संस्थाओं से सांठगांठ कर कोरोना के संदिग्ध शवों का अपने पसंदीदा मुक्तिधामों में अंतिम संस्कार करवा रहे हैं। यह बड़ी लापरवाही तब उजागर हुई जब ग्वारीघाट मुक्तिधाम में पीपीई किट पहनकर पहुंचे परिजनों को  एक शव के अंतिम संस्कार के पहले मीडिया के कैमरों ने कैद किया। पूछताछ में इस बात का खुलासा हुआ है कि कुछ लोगों ने नगर निगम के कर्मचारियों से मिलीभगत कर कोरोना संदिग्ध का शव ग्वारीघाट के मुक्तिधाम में अंत्येष्टि कराने की कोशिश की। प्रशासन की बड़ी चूक उजागर होने के बाद शहर में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में मौके पर पहुंची पुलिस ने ग्वारीघाट मुक्तिधाम में शव का अंतिम संस्कार रोक दिया और तय गाइडलाइन के मुताबिक शव को अंतिम संस्कार के लिए चौहानी मुक्तिधाम के लिए रवाना कर दिया। पुलिस की दलील है कि प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा के बाद ग्वारीघाट में किसी भी प्रकार के अंतिम संस्कार पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है और कोरोना मरीजों और संदिग्धों के शवों का अंतिम संस्कार चिन्हित कब्रिस्तान और मुक्तिधाम में ही किया जा रहा है। मीडिया के दखल के बाद भले ही पुलिस ने ग्वारीघाट मुक्तिधाम में कोरोना के संदिग्ध शव की अंत्येष्टि नहीं होने दी लेकिन सवाल यह उठता है कि नियमों की धज्जियां उड़ा कर शहर के अलग-अलग मुक्तिधामों  में अब तक कितने अंतिम संस्कार  किए जा चुके हैं और अगर इससे कोरोना का संक्रमण फैला है तो इसका जिम्मेदार आखिर कौन है?