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DRDO ने बनाई ऐसी जैकेट जिस पर नहीं होगा AK-47 की गोली का असर

डीआरडीओ ने एके 47 की गोलियों को बेअसर करने वाली बुलेट प्रूफ जैकेट बनाई है। परीक्षण में सफल होने के बाद इसे सेना, अर्धसैनिक बल और पुलिस के लिए बनाया जाएगा।
डीआरडीओ से कहा गया था कि वह घातक रायफल एके 47 की गोलियों को बेअसर करने वाली जैकेट बनाए। यह रायफल सुरक्षा बलों के साथ-साथ आतंकियों और दुश्मन की सेना में भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है।
वर्तमान में उपलब्ध बुलेट प्रूफ जैकेट ऐसे घातक वार ङोलने में सक्षम नहीं हैं। डीआरडीओ के एक अधिकारी के अनुसार, नया संस्करण एके 47 के खिलाफ भी असरदार साबित होगा।
कानपुर में निर्माण
डीआरडीओ की कानपुर स्थित प्रयोगशाला बुलेट प्रूफ जैकेट तैयार कर रही है। उसने रक्षा मंत्रालय के जीएसक्यूआर मानकों के अनुरूप बुलेट प्रूफ जैकेट के कई संस्करण तैयार किए हैं, जिनके परीक्षण चल रहे हैं।
बार-बार होता है बदलाव
डीआरडीओ का कहना है कि जब भी बुलेट प्रूफ जैकेट के एक संस्करण के परीक्षण सफल होते हैं, तब तक सेना जीएसक्यूआर मानकों में बदलाव कर देती है। उनमें कुछ नई खूबियां जोड़ दी जाती हैं। इसलिए डीआरडीओ को दोबारा अपनी जैकेट में भी बदलाव करना पड़ता है।
अभी तकनीक में कमी
वर्तमान में सेना के पास जो जैकेट हैं, वे पुरानी तकनीक पर बनी हैं। ये घातक हथियारों से बचाव करने में सक्षम नहीं होने के साथ ही जवानों के गिरने या पलटी खाने की स्थिति में उनके शरीर से खिसक जाते हैं। कुछ समय पहले बीएमडब्ल्यू कंपनी ने दावा किया था कि एकमात्र उसकी कारें ही एके 47 रायफल की गोली बेअसर कर सकती हैं।
300 मीटर से ज्यादा रेंज: एके 47 करीब साढ़े तीन सौ मीटर तक हमला करती है, इसलिए इसकी गोलियों की गति तीव्र होती है। खासकर जब नजदीक से फायर किया गया हो।